नीमच: मनासा क्षेत्र में बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पुतले फूंके जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना को लेकर अब स्थानीय राजनीति और प्रशासन के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई है। हाल ही में, मनासा थाने के प्रभारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए उनके खिलाफ सख्त एक्शन लेने की मांग उठी है। इस सिलसिले में भाजपा कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की अगुवाई में पुलिस अधीक्षक (SP) को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा गया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत 24 जुलाई 2026 को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की तरफ से मनासा में विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पुतला दहन किया गया था। ज्ञापन सौंपने वालों का तर्क है कि इस तरह के कृत्य से न सिर्फ क्षेत्र का राजनीतिक माहौल बिगड़ा है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवालिया निशान लगे हैं।
शिकायतकर्ता और भाजपा नेताओं का मुख्य आरोप है कि इस संवेदनशील घटना के बाद प्रशासन ने मामले को लीपापोती करने की कोशिश की। घटना के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय केवल एक निचले स्तर के आरक्षक या प्रधान आरक्षक पर गाज गिरा दी गई, जो कि न्यायसंगत नहीं है।
थाना प्रभारी की भूमिका पर उठे सवाल
ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया गया है कि यदि इस तरह के राजनीतिक प्रदर्शन की पहले से भनक थी, तो इसे रोकना स्थानीय पुलिस प्रशासन और विशेषकर थाना प्रभारी की प्राथमिक जिम्मेदारी थी। कानून व्यवस्था बनाए रखने में हुई इस चूक और कथित लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। साथ ही, मांग की गई है कि केवल छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाने के बजाय पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच करवाकर मुख्य अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि इस प्रकरण में निष्पक्ष और त्वरित कदम नहीं उठाए जाते हैं, तो इस पूरे मामले से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी अवगत कराया जाएगा।
यह ज्ञापन भाजपा कुशाभाऊ ठाकरे मंडल (मनासा) के सोशल मीडिया प्रभारी एवं नगर परिषद मनासा के वार्ड क्रमांक-2 के पार्षद प्रतिनिधि दिनेश राठौर की ओर से प्रस्तुत किया गया है।
